विदेशी राष्ट्रपति सड़क पर जॉगिंग, और हमारे नेता रोड खाली करा कर!

राघवेन्द्र मिश्रा
राघवेन्द्र मिश्रा

Emmanuel Macron ने 17 फरवरी 2026 से शुरू हुए अपने तीन-दिवसीय भारत दौरे के दौरान मुंबई की सड़कों पर मॉर्निंग जॉग कर सबको चौंका दिया। आमतौर पर जब कोई वैश्विक नेता शहर में होता है, तो ट्रैफिक थम जाता है यहाँ तस्वीर अलग दिखी हल्की सुरक्षा, खुली सड़कें और एक सहज public connect।

सवाल उठना लाज़िमी है क्या हमारे नेता भी बिना ‘लाल बत्ती इगो’ के जनता के बीच ऐसे निकल सकते हैं?

डिप्लोमेसी ऑन द रन: Jogging से MOUs तक

Narendra Modi और Macron के बीच कई अहम समझौते (MOUs) साइन होने हैं। दोनों नेता Airbus H125 helicopter assembly line का वर्चुअल उद्घाटन करेंगे जो भारत-फ्रांस रक्षा और एविएशन सहयोग को नई उड़ान देगा।

साथ ही “Franco-Indian Year of Innovation” और Franco-Indian Innovation Network की डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्चिंग भी इस विजिट का बड़ा आकर्षण है।
डिप्लोमेसी अब सिर्फ बंद कमरों में नहीं इनोवेशन, स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी के जरिए पब्लिक स्पेस में भी दिख रही है।

Airbus H125: Make in India को Global Push

Airbus का H125 हेलिकॉप्टर असेंबली लाइन भारत में शुरू होना, मेक-इन-इंडिया को ठोस आधार देता है। यह सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं यह संदेश है कि भारत अब मार्केट नहीं, मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर है।

हमारे यहां अक्सर रिबन कटता है, फोटो खिंचती है, और फिर फाइलें धूल खाती हैं। उम्मीद है यह पहल ‘फाइल टू फील्ड’ तक पहुँचेगी।

Leadership Style: Symbolism Matters

Macron की मॉर्निंग जॉग सिर्फ फिटनेस रूटीन नहीं थी; यह एक पॉलिटिकल मैसेज भी था “मैं accessible हूँ।”

भारत में VIP कल्चर अभी भी गाड़ी के काफिले और सायरन से मापा जाता है। अगर नेता बिना रोड ब्लॉक किए, बिना 20 गाड़ियों के काफिले के जनता के बीच चल सकें तो लोकतंत्र की तस्वीर अलग दिखेगी।

Franco-Indian Year of Innovation: Future का Blueprint

Innovation Network का डिजिटल प्लेटफॉर्म स्टार्टअप्स, रिसर्चर्स और इंडस्ट्री के बीच पुल बनेगा। यह साझेदारी AI, ग्रीन एनर्जी, डिफेंस टेक और स्पेस सेक्टर तक फैली है। डिप्लोमेसी अब सिर्फ हाथ मिलाने तक सीमित नहीं यह कोड, डेटा और टेक्नोलॉजी की भाषा बोल रही है।

बड़ा सवाल: क्या हम उम्मीद कर सकते हैं?

हमारे नेताओं से भी सादगी और सहजता की उम्मीद की जा सकती है लेकिन इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति चाहिए। सुरक्षा जरूरी है, पर ‘दूरी’ नहीं। लोकतंत्र में नेता और जनता के बीच की दूरी जितनी कम होगी, भरोसा उतना मजबूत होगा।

Jogging से ज्यादा जरूरी है Journey

Macron का जॉग एक प्रतीक है। असली परीक्षा उन समझौतों की है जो साइन होंगे और उन प्रोजेक्ट्स की जो जमीन पर उतरेंगे। अगर Innovation Network सच में युवाओं तक पहुँचा, अगर Airbus प्रोजेक्ट रोजगार लाया तो यह दौरा फोटो-ऑप नहीं, फ्यूचर-ऑप कहलाएगा।

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